Monday, May 8, 2017

तलाश

मैं अपने मन के जंगल में 
हूँ ढूंढ़ रहा एक कविता को 
कुछ सुनी हुई, कुछ देखी सी 
कुछ भूली सी, अनलेखी सी 

भाग कर थक सा गया हूँ 
लेकिन मन में एक इच्छा है 
एक पंक्ति, एक शब्द, एक लय 
एक नयी कविता की तृष्णा है

हर पत्ती और हर वृक्ष से 
अब पूछ पूछ कर चलता हू 
देखा है मेरी कविता को?
या शायद कुछ सुना ही हो 

छाया मातम इस जंगल में 
सब फसे हुए इस दंगल में 
और मेरी कविता सरसराती
अब घूम रही है मंगल पे 

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I probably suck at writing Hindi poems. But since when has sucking at something stopped me from doing it? 

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